11 मुखी रुद्राक्ष मंत्र – 11Mukhi Rudraksha Mantra

11 मुखी रुद्राक्ष मंत्र – 11Mukhi Rudraksha Mantra

 

11 मुखी रुद्राक्ष मंत्र –

11 मुखी रुद्राक्ष का मंत्र शुद्ध रूप से उपांशु रूप में यदि उच्चारित किया जाए तो व्यक्ति को बहुत ही अद्वितीय गुणों की प्राप्ति होती हैl अद्वितीय लाभों की प्राप्ति होती हैl इससे भगवान हनुमान जी की भी कृपा प्राप्त होती है।

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ऐसा माना जाता है, कि, 11 मुखी रुद्राक्ष ना केवल भगवान भोलेनाथ का स्वरूप है, ना केवल भोलेनाथ का अभिन्न अंग है, बल्कि स्वयं श्री राम जी के सेवक राम दूत हनुमान जी का स्वरूप 11 मुखी रुद्राक्ष में देखा जाता है, ऐसे वीर हनुमान जी की शक्तियां इस रुद्राक्ष को परिपूर्ण बनाती है, जो स्वयं जगत के पालनहार जगत नारायण श्री राम जी के कार्यों को भी क्षण भर में संपन्न करने वाले वायु पुत्र श्री हनुमान जी की कृपा से युक्त होते हैं, कलयुग के देवता के रूप में भगवान बाबा काल भैरव तथा वीर हनुमान बजरंगबली को जाना जाता है, तथा ऐसा माना जाता है, कि इन के संरक्षण में रहने वाले लोग पूरी तरह से हर व्याधि विघ्न उसे सुरक्षित रहते हैंl प्रभु की कृपा दृष्टि सदैव उन लोगों पर बनी रहती है, जो 11 मुख वाले रुद्राक्ष को धारण करते हैं lप्रभु की लीला अपरंपार है, जिसे केवल कालचक्र के माध्यम से ही समझा जा सकता हैl

11 मुखी रुद्राक्ष न केवल भगवान हनुमान जी की शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि भगवान इंद्र देव की भी शक्तियों को वर्णित करते हैंl इंद् जिन्हें मुख्य रूप से वृष्टि प्रदाता के रूप में एवं युद्ध के देवता के रूप में जाना जाता हैl इन्हें इनके पराक्रम शौर्य बल के कारण बहुत ही श्रेष्ठ पद प्राप्त है, इसलिए इन्हें स्वर्ग का राजा कहा जाता है,  तथा इन्हें सर्वशक्तिमान होने का भी वरदान है, इसलिए इन्हें संपूर्ण ब्रह्मांड का एकमात्र शासक एवं नियंता के रूप में अलंकृत किया जाता है।

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11 मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले जातकों को भगवान इंद्र की भी कृपा बनी रहती है, तथा यह अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं, एवं हर परिस्थिति में उनके सहायक संरक्षक के रूप में साथ देते हैंl इस मनका को धारण करने वाले को विषम परिस्थितियों में भी भगवान इंद्र तथा भगवान हनुमान जी का संरक्षण प्राप्त रहता है, जिससे जातक किसी भी परिस्थिति से उभरने में उससे बाहर निकलने में स्वयं ही सबल होता हैl

ऐसे जातक जो अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं, तथा क्रोध की अधिकता उनके विनाश का कारण बन जाती है, या उनके द्वारा कहे गए क्रोध में अपशब्द किसी के मन में इतने अधिक स्तर तक बैठ जाते हैं, कि जातक के विषय में लोगों के मन में विभिन्न प्रकार की भ्रांतियां उत्पन्न होने लगती हैं, जिससे जातक को अनेक प्रकार की समस्याएं झेलनी पड़ती हैl लोगों के समक्ष उसकी प्रवृत्ति क्रोधित एवं उग्र व्यक्तित्व के रूप में निरूपित होती है, जिसके कारण जातक कई बार सामाजिक दृष्टिकोण से खुद को बहुत ही अलग-थलग पाता है, तथा भावनात्मक रूप से किसी व्यक्ति विशेष के मान सम्मान एवं ठहराव की स्थिति ना प्राप्त करने के कारण उसका मन और अधिक विचलित रहने लगता हैl ऐसे लोगों को 11 मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए l

यह ना केवल उनके मन को शांत करता है, बल्कि क्रोध जैसी विक्षिप्त मानसिकता क्रोध जैसी विषाक्तता को पूरी तरह से नष्ट कर देता है, जब तक किसी विशिष्ट स्थान पर आक्रामक होने की आवश्यकता ना हो तब तक व्यक्ति अपने मन, मस्तिष्क ,हृदय पर बहुत ही संयम रखता है lउसके आचरण में एवं व्यवहार में बहुत ही उत्कृष्ट संयम देखने को मिलता है, उसे असीम मानसिक शांति की प्राप्ति होती है, तथा लोगों का रवैया भी उसके साथ बदलने लगता है lलोगों के समक्ष उसकी व्यक्तित्व की उत्तम छाया निरूपित होती हैl

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11मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति की स्मरण शक्ति वैचारिक शक्ति तर्क एवं वितर्क जैसी अद्वितीय गुणों से वह परिपूर्ण होता है lउसकी मानसिक ऊर्जा बहुत ही प्रखर होती है lतीव्र बुद्धि एवं अशाधारण मानसिक क्षमता उसे सफलता के सर्वोत्तम उन्नति प्रदान करती हैंl जातक का निष्पक्ष दृष्टिकोण उसे समाज में यश कीर्ति प्रसिद्धि प्राप्त करने में मदद करता है lविवादास्पद विषयों में भी जातक की स्पष्ट दृष्टिकोण एवं धाराप्रवाह बोलने की क्षमता उसके सामाजिक स्थिति में वृद्धि करती हैl जातक को स्वयं के विचारों को एवं भाव को अभिव्यक्त करने की कौशल क्षमता उसे विभिन्न क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त करने में मदद करती हैंl
बौद्धिक रूप से वह बहुत ही समृद्ध बनता है।

11 मुखी रुद्राक्ष को मंगल ग्रह से प्रभावित माना जाता है lमंगल जो एक क्रूर ग्रह के रूप में जाना जाता हैl जिसकी प्रवृत्तियां राहु केतु तथा शनि ग्रह से बहुत अधिक मिलती-जुलती हैंl मंगल ग्रह क्रूर होने के साथ-साथ बहुत ही उग्र भी होता हैl जिसे भौमपुत्र भी माना जाता हैl कमजोर मंगल कार्य सिद्धि के समय विघ्न की अनुभूतियों को प्रदान करता है, तथा इसके प्रभाव के कारण व्यक्ति उचित निर्णय नहीं ले पाता हैl वैवाहिक जीवन में कई तरह के उत्तल पुथल देखने को मिलते हैंl जातक को भ्रामक व्यभिचार जैसी दुर्गुण प्रदान करता है,मंगल के द्वारा उत्पन्न किए गए मांगलिक दोष या विभिन्न प्रकार के दुर्गुण दोस जातक को दांपत्य सुख में कमी प्रदान करते हैंl वाद-विवाद जैसी परिस्थितियां सदैव बनी रहती हैl

व्यवसाय में भी जातक को अच्छे परिणाम प्राप्त नहीं होते हैंl ऐसे में 11 मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए, जिससे मंगल ग्रह की स्थिति को अनुकूल बनाया जाया जा सकेl स्त्री वर्ग के लिए इसे सबसे अनुकूल माना जाता है क्योंकि इसे धारण करने से उनकी सौभाग्य में वृद्धि होती हैl उनका भाग्य प्रबल होता है, तथा उनके पति की आयु दीर्घ यही होती हैl इसमें मौजूद अनेक औषधीय तत्व मंगल ग्रह के द्वारा उत्पन्न किए जा रहे किसी भी तरह के रोग को पूरी तरह से ठीक करने की क्षमता रखते हैंl रक्त की कमी या रक्त से संबंधित कोई भी विकार हो या नेत्र से संबंधित विकार या अन्य किसी तरह के रोग हो lसभी में यह लाभप्रद माना जाता है।

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11 मुखी रुद्राक्ष की माला से निम्नलिखित मंत्र को यदि उपांशु जप किसी व्यक्ति विशेष के द्वारा किया जाता है, तो उसके व्यक्तित्व में अद्भुत बदलाव आते हैं, तथा जातक हनुमान जी एवं इंद्रदेव तथा माता लक्ष्मी एवं गणेश भगवान की शरण में रहता है, जिससे विभिन्न प्रकार के कष्ट आदि भी उसे छू नहीं पाते हैंl उसे हर ओर से सुरक्षा प्राप्त होती है, तथा विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के संयोग बनते हैंl
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