लाजवर्त की माला – Lajvart Ki Mala

लाजवर्त की माला – Lajvart Ki Mala

 

लाजवर्त की माला

लाजवर्त की माला नीले रंग की आभा युक्त देखने में बहुत ही मनमोहक एवं आकर्षक होता है, तथा इस पर विद्यमान प्राकृतिक रूप से भूरे एवं हरे रंग के प्रतिरूप इसकी छवि को और अधिक आकर्षक बना देते हैंl कभी-कभी इसके ऊपर काले एवं सुनहरे रंग के रेसे भी दिखाई पड़ते हैl इसका वर्ण बिल्कुल अपराजिता पुष्प के समान नीला होता है, तथा नीलकंठ पक्षी के नीले पंखों के समान नीला वर्ण होता है। महिला वर्ग के द्वारा इस की माला आभूषण के रूप में प्रयोग में लाया जाता है lकभी-कभी इस माला का प्रयोग छोटे बच्चों को ऊपरी बाधाओं से एवं बुरी नजर जादू टोना तंत्र मंत्र जैसी चीजों से बचाने के लिए उन्हें धारण करवाया जाता है।

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ज्योतिष विद्या के अनुसार भी इस रत्न का बहुत बड़ा महत्व रखता है, क्योंकि यह एक ऐसा रत्न होता है, जिसमें पापी एवं क्रूर ग्रह शनि, राहु -केतु के द्वारा दिए जा रहे किसी भी तरह के कष्ट या दुष्प्रभाव को दूर करने की क्षमता इस रत्न में विद्यमान रहते हैं, जिन लोगों को इन तीनों ग्रहों के द्वारा किसी भी तरह का कष्ट दिया जा रहा है, तो इस रत्न को विधिवत तरीके से धारण कर उपयोगकर्ताओं को बहुत लाभ पहुंचता है।

शनिदेव जिनको देखकर स्वयं काल भी भयभीत हो उठता है, जिनके न्याय प्रणाली से मनुष्य क्या देवता भी कांप उठते हैं, ऐसे शनि देव के लिए लोगों के मन में भय व्याप्त होना स्वभाविक सी बात है, किंतु शनिदेव की यह एक खासियत है, कि इनके प्रभाव वाले व्यक्ति में यह खासियत होती है, कि जो उसके भाग्य में नहीं लिखा हुआ होता है, फिर भी अपनी कड़ी मेहनत से उस चीज को वह हासिल कर सकता है lशनि ग्रह की कृपा ऐसे जातकों के ऊपर बहुत अधिक होती है, जो कोई भी कार्य कर्मठता के साथ दृढ़ निश्चय के साथ निपुणता के साथ करते हैंl मेहनती लोगों पर सदा शनि देव की कृपा बनी रहती है। शनि देव एक कर्म प्रधान देवता है, इसलिए किसी भी जातक को यह कर्म के आधार पर फल प्रदान करते हैं, इनके कुदृष्टि किसी के जीवन को पूरी तरह से बर्बाद कर देती है।

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केतु जो अनुसंधान, ध्यान, आध्यात्मिकता का बोध, स्वयं का बोध, गूढ़ ज्ञान, उपवास, एकाग्रता, देव पूजा ,मंत्र ,साधना, तीर्थ यात्रा का विचार आदि का कारक केतु ग्रह से संबंधित होता है।

राहु जिसके प्रति भले ही हमारे मन में बहुत नकारात्मक चीजें भरी हुई है lयह एक धारणा सी बन गई है, कि राहु केवल नकारात्मक चीजें ही प्रदान करता है, एवं इसकी दृष्टि किसी को भी बहुत दुखदाई जीवन प्रदान कर सकता है, जबकि ऐसा नहीं हैl राहु भी सकारात्मक चीजें जातकों को प्रदान करता हैl कभी-कभी यह सांसारिक सुख, भौतिक सफलता तथा गलत चीजों के प्रति एक अदम्य जुनून पैदा करता है, जिससे जातक इन सभी चीजों को प्राप्त करने के लिए जुनूनी होकर खूब मेहनत करता है, और उसमें सफलता भी प्राप्त करता हैl गुरु के समान ज्ञान भी प्रदान करने की क्षमता राहु में है, जो बुध को भी चुप करा दें वह होता है- राहुl हमारा विस्तृत ज्ञान भी तो राहु ही है। यह जिस ग्रह के साथ बैठ जाता है। उसके साथ खुद को परिवर्तित कर लेता है, और उनसे संबंधित प्रभाव जातक को प्रदान करने लगता है। कभी यह जातक को नेतृत्व कर्ता के रूप में परिवर्तित करता है, तो कभी गुरु का रूप प्रदान करता है। कभी नेता के रूप में तो कभी सन्यासी के रूप में निरूपित करता है।

ऐसी तीनों महान शक्तियों का सार लिए हुए यह लाजवर्त रत्न अपने आप में एक विशिष्ट रत्न है, एवं ऐसा ऊर्जा पुण्य है, जो तीनों ग्रहों के आशीर्वाद को प्राप्त करने में जातक के सारे मार्ग को प्रशस्त कर देता है।

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लाजवर्त की माला का उपयोग-

1. मंत्र सिद्धि के लिए लाजवर्त की माला का उपयोग किया जाता है, ऐसा माना जाता है, कि बाबा भैरव से संबंधित मंत्र हो या मां काली से संबंधित मंत्र हो यदि लेपिस लजूली के माला से जप किया जाए तो वह अति शीघ्र सिद्ध हो जाता है, इसके साथ-साथ इसे धारण करने से उपयोगकर्ता का अध्यात्मिक विकास बहुत तेजी से होता है। अध्यात्मिक विकास के विभिन्न चरणों में सफलता प्राप्त करने के लिए भी लोगों के द्वारा इस माला को धारण किया जाता है। इसकी ऊर्जा इतनी अधिक प्रभावशाली होती है, कि सुक्ष्म तरंगों को भी जातक आसानी से महसूस कर सकता हैl मानसिक तौर पर हो या शारीरिक तौर पर उसका चित पूरी तरह से जागृत हो जाता है। इसके साथ साथ उपयोगकर्ता को यह असीम मानसिक शांति प्रदान करता है।

2. उत्कृष्ट दैनिक क्रियाकलाप के लिए भी लोगों के द्वारा इसका उपयोग किया जाता है।

3. इसे धारण करने से मानसिक तौर पर जितनी भी उलझन होती है, सभी को यह दूर करता हैl इसके साथ-साथ इस में विद्यमान औषधीय गुण उपयोगकर्ता को विभिन्न प्रकार के रोगों से जैसे- मिर्गी, दिल संबंधित रोग ,किडनी संबंधित रोग, त्वचा संबंधित रोग, स्वास्थ्य संबंधित रोग ,मन संबंधित रोग, रक्तचाप की समस्या, अनिद्रा, चिरचिरा हट, चीखना चिल्लाना ,पागलपन जैसी स्थिति आदि को भी दूर रखता है, या यदि कोई रोग से जातक ग्रसित भी है, तो उसे स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

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4. इस माला को धारण करने से दिमाग की सक्रियता काफी बढ़ जाती है, तथा दिमाग किसी भी नकारात्मक चीज से बोझिल होने के बजाय सकारात्मक चीजों के प्रति अधिक सक्रिय रहता है, तथा इस रत्न की खासियत होती है, कि किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने की क्षमता रखता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह को बहुत अधिक बढ़ा देता है, जिससे हर और सकारात्मक ऊर्जा का चक्र बनता रहता है, जिससे जातक विभिन्न प्रकार की उलझनों में उलझने के बजाय एक दूरदर्शी के रूप में कार्य करता है lयह रत्न उसे दूरदर्शिता प्रदान करता है, उसकी समझ को बढ़ाता है, उसके ज्ञान के दायरे को बढ़ा देता है। बौद्धिक कलाओं में उत्कृष्टता लाने में भी इस रत्न की अपनी ही एक महत्ता होती है।

5. किसी भी कार्य के प्रति निष्ठा एवं ईमानदारी की भावना को यह रत्न उत्पन्न करने के लिए प्रेरित करता है, कार्यों का ठीक तरीके से निर्वहन करने की प्रेरणा यह रत्न प्रदान करता है।

6. दरिद्रता को दूर करता है, तथा कर्ज से मुक्ति दिलवाने में भी यह रत्न सक्षम होता है। आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ-साथ सांसारिक सुखों के साधन को प्राप्त करने में यह रत्न बहुत मदद करता है। विभिन्न प्रकार के भौतिक संसाधनों को भी प्राप्त करने की क्षमता उपयोगकर्ता को यह रत्न प्रदान करता है।

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