लाजवर्त क्या है – Lajvart Kya Hai

लाजवर्त क्या है – Lajvart Kya Hai

 

लाजवर्त क्या है – Lajvart Kya Hai

लाजवर्त क्या है- लाजवर्त एक स्टोन होता है, जो लैजूराइट नामक खनिज से बना हुआ होता हैl यह स्टोन प्राकृतिक रूप से संगमरमर के अंदर से प्राप्त होता हैl यह स्टोन संगमरमर में धंसा हुआ होता है। इसका रंग देखने में बिल्कुल मोर पक्षी के रंग के समान नीला होता हैl इसका रंग नीलकंठ पक्षी के पंखों के समान नीला होता हैl इसके ऊपर प्राकृतिक रूप से काले एवं सुनहरे रंग के छिटे पाए जाते हैं, जो इसकी खूबसूरती को और अधिक बढ़ा देते हैंl इसमें हरे रंग तथा भूरे रंग के प्राकृतिक तौर पर रेशा देखने को मिलते हैं lसबसे अधिक कीमती एवं उपयुक्त स्टोन गाढ़ा रंग का लाजवर्त रत्न (lajward ratna benefits in hindi) माना जाता है। यह रत्न देखने में बहुत ही सुंदर ,ठोस ,चिकना एवं अपारदर्शी होता है।

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जिस प्रकार विभिन्न ग्रहों के लिए विभिन्न नवरत्न बताए गए हैं, जैसे- पन्ना रत्न बुध ग्रह के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, ऐसे ही पुखराज गुरु ग्रह के लिए शनि ग्रह के लिए सबसे उपयुक्त रत्न नीलम को माना जाता है, एवं राहु के लिए गोमेद रत्न धारण किया जाता है, केतु से संबंधित परेशानियों को दूर करने के लिए जातकों के द्वारा लहसुनिया रत्न धारण किया जाता है, किंतु कभी-कभी यह तीनों पाप ग्रह राहु केतु एवं शनि तीनों ही किसी जातक को बहुत कष्ट देने लगते हैं, एवं उसकी जन्मपत्रिका में इन तीनों के द्वारा जीवन में बहुत अधिक कष्ट उत्पन्न किया जाने लगता है, तो ऐसी परिस्थिति में लाजवर्त रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि लाजवर्त (lajward ratna ke fayde) एक ऐसा रत्न है, जो पापी एवं क्रूर ग्रहों शनि ग्रह तथा उसके अनुयाई राहु एवं केतु के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए धारण किया जाता हैl यदि जन्मपत्रिका में तीनों ग्रह अशुभ स्थिति में उपस्थित है, या पूरी तरह से दूषित है, तो ऐसी स्थिति में लाजवर्त रत्न धारण करना सबसे उपयुक्त माना जाता है।

लाजवर्त रत्न (lajward ratna dharan karne se kya hota hai) को धारण करने का सबसे उपयुक्त दिन मंगलवार एवं शनिवार के दिन माना जाता है, सबसे पहले स्नान आदि से निवृत होकर लाजवर्त रत्न को पंचामृत एवं गंगाजल से धोकर किसी साफ एवं स्वच्छ कपड़े से पोछ कर घर के मंदिर में एक काले कपड़े के ऊपर रख देंl उसके पश्चात गूगल लोंग एवं कपूर से उसकी आरती करें एवं तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करेंl उसके पश्चात यदि आप चाहें तो शनि राहु केतु तीनों के बीज मंत्र एक-एक करके उच्चारित कर भी इसे अभिमंत्रित कर सकते हैं, तो इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि आप जिस भी मंत्र का प्रयोग लाजवर्त रत्न की शक्तियों को जागृत करने में कर रहे हैं।

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उसका जप अधिक से अधिक संख्या में होना चाहिए, तभी इसका प्रभाव फलित होगा इसे धारण करने का सबसे उपयुक्त समय सूर्य उदय से पूर्व होता है, तथा संध्या बेला में जब सूर्य की किरणें चली जाती है, तब भी लाजवर्त रत्न (lajward ratna dharan karne ke fayde) को धारण किया जा सकता हैl इस बात का भी ध्यान अवश्य रखें कि आपके द्वारा जब किया जाने वाला मंत्र आप से पूरी तरह से सही उच्चारित हो उसकी शब्दावली पूर्ण रूप से शुद्ध होनी चाहिए। लाजवर्त रत्न को दाएं हाथ की मध्यमा उंगली या फिर बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में भी धारण किया जा सकता हैl इस रत्न को चांदी या पंच धातु में धारण करना सबसे अच्छा माना जाता हैl इसे अष्ट धातु में भी आप धारण कर सकते हैं, इसकी अंगूठी या ब्रेसलेट या लॉकेट जो भी आपको सुविधा लगे उसे आप पहन सकते हैं।

अपनी जन्म पत्रिका का विशेष अवलोकन कराने के पश्चात ही लाजवर्त रत्न (lajward ratna kya hai) को धारण करें क्योंकि हर रत्न का अपना सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रभाव होता हैl यदि आपकी लग्न कुंडली के अनुसार कोई रत्न धारण करेंगे तभी आप को सकारात्मक एवं अनुकूल लाभ प्राप्त हो सकता है, किंतु यदि विपरीत ग्रहों के रत्न को धारण कर लेंगे तो शायद स्थितियां आपके प्रतिकूल हो जाए इसलिए किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व किसी विद्वान ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें।

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लाजवर्त धारण करने से किसी उपयोगकर्ता को निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो सकते हैं-

1. लाजवर्त (lajward ratna kaisa hota hai) एक ऐसा रत्न है, जिसका उपयोग करने से जातक स्वयं को बहुत चुस्त एवं दुरुस्त महसूस करता हैl आलस्य एवं सुस्ती उससे कोसों दूर चली जाती है, जिन बच्चों को आलस ने अपना शिकार बनाया हुआ है, या किसी भी आयु वर्ग के लोग जिनको आलस एवं सुस्ती संबंधित समस्या हैl उनके द्वारा यदि लाजवर्त रत्न धारण किया जाता है, तो इस समस्या को पूरी तरह से समाप्त करने की क्षमता रत्न में व्याप्त होती है।

2. लाजवर्त रत्न (lajward stone dharan karne ke fayde) का औषधीय गुण भी कुछ कम नहीं हैl इसे धारण करने से बहुत से रोग जैसे -ह्रदय के रोग हो ,पीलिया हो ,चर्म रोग, मिर्गी, अवसाद ,पथरी ,बवासीर या त्वचा संबंधित कोई रोग इन सभी रोगों में लाजवर्त रत्न काफी कारगर सिद्ध होता है, तथा जातक को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता हैl आजकल प्रतिस्पर्धा के युग में बहुत से लोग मानसिक तौर पर काफी बीमार रहने लगे हैं lछोटे बच्चे हो या बड़े बुजुर्ग हर किसी के ऊपर अवसाद जैसी स्थिति का गहरा प्रभाव पड़ता है, ना जाने क्यों लोग आभासी दुनिया में क्यों जीने लगे हैं, जबकि वास्तविक दुनिया तो इतनी खूबसूरत है, कि जिसकी परिकल्पना भी हम नहीं कर सकते हैं।

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फिर भी विभिन्न उलझनों में पढ़कर हम सत्य से काफी दूर जाने लगते हैं lयही कारण है, कि लोगों में अवसाद जैसी स्थिति उत्पन्न होने लगी है, तथा उनकी स्थिति को यह रोग बहुत अधिक भयावह बना देता है, ऐसे में प्रकृति द्वारा प्रदान किया गया लाजवर्त स्टोन (lajward stone ke chamatkar) चमत्कारिक रूप से अवसाद जैसी स्थिति हो या अनिद्रा जैसी स्थिति भयानक सपने आना या मानसिक तौर पर कोई भी समस्या हो उन सभी को यह दूर करने में सक्षम होता है।

3. आकस्मिक रूप से होने वाले रुपए पैसे संबंधित हानियों को भी लाजवर्त रत्न दूर करने में बहुत अधिक अद्वितीय भूमिका निभाता है, तथा जातक की धन संबंधित स्थिरता में बहुत लाभ पहुंचाता हैl दरिद्रता का नाश कर धन-धान्य से व्यक्ति को संपन्न बनाता है। लाजवर्त रत्न (lajward ratna ke fayde) कर्ज से भी मुक्ति दिलाने में काफी भूमिका निभाता है।

4. घर में वाद-विवाद कलह क्लेश जैसी स्थिति को यह रत्न दूर करता है, तथा परिवार के लोगों के बीच सामंजस्य स्थापित करने में बहुत मदद करता है, जिससे घर में सुख- शांति बनी रहती है।

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