एक मुखी रुद्राक्ष की पहचान – Yek Mukhi Rudraksha Ki Pahchan

एक मुखी रुद्राक्ष की पहचान – Yek Mukhi Rudraksha Ki Pahchan

 

एक मुखी रुद्राक्ष की पहचान –

निम्नलिखित कुछ बिंदुओं के आधार पर एक मुखी रुद्राक्ष की पहचान की जा सकती है-

1. प्रकृति जिस भी चीज का निर्माण करती है lउसे वह विशिष्ट गुणों से युक्त बनाती है, जिसे विभिन्न प्रकार की रसायनिक अभिक्रियाओ के द्वारा बना पाना या उस प्रकार की विशिष्ट गुण को किसी वस्तु विशेष को प्रदान कर पाना असंभव है, इसलिए रुद्राक्ष का भी अपना एक प्राकृतिक रंग होता है, तथा उसे जांचने के लिए जब गर्म पानी में उबाल आ जाता है, तो उसके स्वरूप में किसी भी प्रकार का परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है lयदि किसी प्रकार की त्रुटि उसके रंगभेद उसके ऊपरी सतह के ऊपर दिखाई पड़ती है, तो उसका तात्पर्य है, कि वह एक अच्छा एवं असली रुद्राक्ष नहीं है lवह किसी भी प्रकार का एक लकड़ी है, जिसे भौतिक रूप से उसे रुद्राक्ष के समान संरचना प्रदान करने की कोशिश की गई हैl अतः एक मुखी रुद्राक्ष को जांचने का यह सबसे उपयुक्त विधि है।

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2. एक मुखी रुद्राक्ष की भौतिक आभा देखने में बिल्कुल अर्धचंद्र के समान होता है, या काजू के समान उसका आकार होता हैl एक मुखी रुद्राक्ष की सतह बिल्कुल वक्र के समान होता है, जिसमें केवल एक ही धारी पाई जाती है lयदि उसके आकार में या धारियों में परिवर्तन देखने को मिले तो वह एक मुखी रुद्राक्ष नहीं हैl कई बार देखा गया है, की एक मुखी रुद्राक्ष में एक रेखा के अलावा कई बार भगवान भोलेनाथ से संबंधित कई प्रकार के चिन्ह उस उत्तरीत हुए रहते हैं, जैसे- डमरू, त्रिशूल ,नाग ,स्वास्तिक आदि किंतु इस प्रकार के भौतिक संरचना वाले रुद्राक्ष यह भी संभव है, कि कृतिम क्रियाकलापों के द्वारा उत्पन्न किया गया हो lअतः इस प्रकार के एक मुखी रुद्राक्ष लेने से बचें।

3. कई बार लोगों के द्वारा अपने लालच में रुद्राक्ष की असली प्रवृत्ति को विकृत करके भी बेचा जाता है। प्रायः एक मुखी रुद्राक्ष दुर्लभ माना जाता है, तथा इसे प्राप्त करना इतना आसान नहीं हैl यह बहुत ही सुंदर एवं दुर्गम इलाकों से प्राप्त होता है, इसलिए इसकी विशेषता इस के चमत्कारिक गुण बहुत अधिक महत्व रखते हैं, इसलिए कई बार लोगों के द्वारा कई अन्य प्रकार के रुद्राक्ष को उसकी वास्तविक आकार में यंत्रों की सहायता से कृतिम रूप से परिवर्तन किया जाता है, ताकि उसे एक एक मुखी रुद्राक्ष के रूप में निरूपित किया जा सकेl अतः इस प्रकार की कोई हल्की सी भी शंका का आपको रुद्राक्ष लेने के वक्त लगे तो उसे बिल्कुल भी ना खरीदें।

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4. जिस प्रकार हमारी बाहरी त्वचा हमारे आंतरिक त्वचा एवं विभिन्न प्रकार के मानवी शरीर के अंगों को सुरक्षा प्रदान करती है, तथा उसकी संरचना में किसी भी प्रकार की परिवर्तन हमें देखने को नहीं मिलता है, इसी प्रकार जब आप असली रुद्राक्ष को किसी चाकू की मदद से उसकी ऊपरी परत को हटाने का प्रयास करेंगे, तो आप देखेंगे कि एक समान बारीक रेशे जैसे आकृतियां उस पर नजर आ रही है, जैसे उसकी ऊपरी सतह में है, तथा रंग में भी कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा हैl यदि किसी भी प्रकार का आप उसके रंग एवं आंतरिक संरचना में परिवर्तन देखते हैं, तो इसका तात्पर्य है, कि वह एक नकली रुद्राक्ष है।

5. यदि रुद्राक्ष को किसी भी प्रकार से प्लास्टिक या किसी और चीज से बनाया गया है, तो वह ताप बर्दाश्त नहीं कर पाएगाl प्राकृतिक रूप से उसमें जो तापको बर्दाश्त करने की क्षमता है, वह उसमें नहीं रहेगी, जिससे जब उसे ताप के समक्ष रखा जाए, तो तो उसके आकार में परिवर्तन होने लगेगाl यदि उसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन आपको नहीं दिखाई पड़ रहा है, इसका अर्थ है, कि वह पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से निर्मित एक रुद्राक्ष है।

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6. प्राकृतिक रूप से निर्मित होने वाले रूद्राक्षा रत्न की संरचना बहुत अधिक सुगठित होती हैl बहुत अधिक संगठित होती हैl उसके सभी कण आपस में बहुत ही उम्दा तरीके से जुड़े हुए होते हैं, जो कि एक गठित संरचना का निर्माण करते हैं lयही कारण है, कि जब प्राकृतिक रूप से निर्मित एक मुखी रुद्राक्ष को जेल में डाला जाता है, तब वह पूरी तरह से डूब जाता है, जबकि यदि इसका निर्माण मानवीय गतिविधियों के द्वारा हुआ है, तब वह जल में डूबने के बजाय वह उसकी सतह पर तैरने लगता हैl हालांकि इस विधि को पूरी तरह से रुद्राक्ष की सत्यता को परखने के लिए प्रयोग में नहीं लाया जा सकता है, क्योंकि ऐसे रुद्राक्ष जो किसी विशिष्ट प्रकार के लकड़ियों के द्वारा निर्मित होते हैं lवह पानी के सतह पर जाकर बैठ जाते हैंl ऐसे में नकली एवं असली के बीच फर्क कर पाना बहुत ही मुश्किल बड़ा कार्य होता है।

7. प्राकृतिक रूप से निर्मित रुद्राक्ष में भी चुंबकीय तत्व मौजूद रहते हैं, जिस प्रकार रत्नों में भी चुंबकीय तत्व की प्रधानता रहती हैl उसी प्रकार रुद्राक्ष में भी रहता है, इसलिए जब उसे तांबे के सिक्कों के बीच में रखा जाता है, तब वह अपने चुंबकीय तत्व की प्रधानता की वजह से उस में कंपन होने लगता है।

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8. ऐसा माना जाता है, कि जो नकली रुद्राक्ष होता है, जब उसे धूप में रखा जाता है, तो उसमें किसी प्रकार की त्रुटि उत्पन्न हो जाती है, या तो उसकी रंगत में बदलाव देखने को मिलता है, या फिर उसके ऊपरी संरचना के ऊपर दरार जैसी चिन्ह उत्पन्न होने लगते हैं, जबकि प्राकृतिक रूप से निर्मित रुद्राक्ष को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता है, ना उसके रंग में बदलाव आता है, ना उसकी ऊपरी सतह में बदलाव आता है, चाहे आप कितना भी देर उसे कड़ी धूप में क्यों न छोड़ दें।

9. रुद्राक्ष को जब सरसों के तेल में कुछ घंटों के लिए डुबोकर रखा जाता है, तब यदि वह अपने पहले रंग की तुलना में अधिक गाढ़ा दिखाई दे तो इसका अर्थ है, कि वह एक असली रुद्राक्ष है, जबकि यदि ऐसा कुछ भी प्रतीत नहीं हो रहा है, तो इसका अर्थ है, कि वह एक नकली रुद्राक्ष है, जिसके कारण सरसों के तेल को अवशोषित करने में असक्षम है, जिसकी वजह से उसके रंग में कोई भी बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है।

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