दो मुखी रुद्राक्ष कौन पहन सकता – Do Mukhi Rudraksha Kaun Pahan Sakta Hai

दो मुखी रुद्राक्ष कौन पहन सकता – Do Mukhi Rudraksha Kaun Pahan Sakta Hai

 

दो मुखी रुद्राक्ष कौन पहन सकता है –

1. दो मुखी रुद्राक्ष उन लोगों के द्वारा धारण किया जा सकता है, जो अपने वैवाहिक जीवन से असंतुष्ट हैl विवाह जीसे हिंदू धर्म शास्त्र में सबसे अधिक मांगलिक कार्य एवं पवित्र बंधन माना जाता है, किंतु दंपतियों के बीच वैचारिक मतभेद के कारण कई बार विवाह विच्छेद जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती हैl वैवाहिक जीवन से सुख -आनंद सब कुछ चला जाता है lकेवल कलह, क्लेश जैसी स्थिति सुख शांति को पूरी तरह से बाधित कर देती हैl विवाद चरमोत्कर्ष तक चला जाता है, जिसके कारण समाधान निकालना असंभव प्रतीत होता है, जिसके कारण विवाह विघटन जैसी समस्याओं को प्रोत्साहन मिल जाता है lवैवाहिक जीवन में असंतुष्टि के कारण व्यक्ति विशेष के सामाजिक एवं धार्मिक स्थल तक इसके नकारात्मक प्रभाव दिखने लगते हैं।

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ऐसी स्थिति में दो मुखी रुद्राक्ष बहुत ही प्रभावी रूप से कारगर होता है, किसी भी तरह के अपवाद की स्थिति को यह दूर करता है, तथा दंपतियों के बीच उचित संबंध एवं उचित सामंजस्य स्थापित करने की क्षमता इसमें विद्यमान होती है, क्योंकि इसमें स्वयं शक्ति तथा शिव की शक्तियां समाहित होती है, तथा 2 मुखी रुद्राक्ष अर्धनारीश्वर का स्वरूप को अलंकृत करता है, इसलिए वैवाहिक जीवन में उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रकार की समस्या के लिए यह एक अनुकूल उपाय के रूप में उपयोग में लाया जा सकता हैl इसके साथ ही माता आदिशक्ति की कृपा तथा भगवान रुद्र की कृपा से उनके गृहस्थ जीवन में कभी भी कोई परेशानी नहीं आती है lउनका जीवन सभी सुख संसाधनों से पूर्ण होता हैl घर- परिवार में सुख शांति का वास होता है, तथा परिवार की मजबूती बढ़ती है l उक्त व्यक्ति के प्रगति के मार्ग खुल जाते हैं, यह रुद्राक्ष उन्हें विभिन्न अवस्थाओं में भी उत्तम लाभ प्रदान करता हैl

2. किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति के यदि विचारों में पतन आने लगता हैl वह संस्कार हीन होने लगते हैl अचानक से उसके व्यक्तित्व में कई नकारात्मक परिवर्तन दिखने लगते हैं, जैसे उसके व्यवहार में नकारात्मक बदलाव आना ,जैसे- चीखना, चिल्लाना ,अधिक क्रोध करना या कर्कश वाणी का प्रयोग करना अपने ही लोगों से काफी बर्बरता तरीके से बात करना आदि l यदि ऐसी परिस्थिति का दंस किसी भी आयु वर्ग के लोगों का जीवन नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहा है, तो उन्हें ऐसी परिस्थिति में दो मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए, इससे उनके विचारों एवं भाव में परिष्कृति आती हैl विचारों में शुद्धता, पवित्रता, धार्मिकता एवं आस्तिकता का बोध देखने को मिलता है।

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3. ऐसे लोग जिनके जीवन में अनुशासन का अभाव होता है, जिसके कारण उनके द्वारा कोई भी कार्य अच्छे तरीके से संपन्न नहीं हो पाता हैl रोजमर्रा के कई नियम कायदों को उनके द्वारा पूरी तरीके से पूर्ण नहीं किया जा पाता है, जिसके कारण वे लोग किसी भी बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं, तथा आलस्य जैसी समस्या से ग्रसित होते हैं, तथा चीजों को सही समय पर पूर्ण करने की वरिष्ठता उनके द्वारा नहीं दी जाती है, जो कि उनके असफलता का सबसे बड़ा कारक बनता चला जाता हैl ऐसे लोगों के द्वारा दो मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए, इससे उनकी ऊर्जा चक्र की शुद्धि होती है, तथा आलस्य जैसी स्थिति दूर होती है, शरीर ,दिमाग नियंत्रण में रहता है।

उनके जीवन से अनुशासनहीनता का भाव पूरी तरह से दूर होता है, तथा विभिन्न चीजों के प्रति अपनी कर्मठता पूर्वक अपने कर्मों का निर्वाहन करते हैं, जिसके कारण उनका मानसिक स्वास्थ्य एवं शारीरिक स्वास्थ्य सुधरता ही हैl इसके साथ-साथ सामाजिक स्थिति भी उत्तम होती है तथा कई प्रकार के बुरी आदतों से भी निराकरण प्राप्त होता हैl उनके जीवन से निष्क्रियता तथा निरर्थकता जैसी चीज में पूरी तरह से समाप्त होने लगती है, तथा विभिन्न पक्षों पर उन्हें यह प्रभावशाली रूप से अनुकूल लाभ प्रदान करता है।

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4. विद्यार्थी वर्ग के लिए यह बहुत ही प्रभावशाली होता है, तथा इसमें अंतर्निहित शक्तियां उनके सर्वांगीण विकास में बहुत अधिक सहायक होती हैl दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से अशुभ एवं आसुरी शक्तियों का प्रभाव छात्रों के ऊपर नहीं होता है, जिससे उनके अंदर अच्छे संस्कार विद्वान होते हैं, जो उनके स्वास्थ्य एवं निर्विघ्नं विकास में बहुत अधिक सहायक होते हैं lइसके साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास में भी यह बहुत मदद करता है उनके एकाग्र शक्ति को मजबूत बनाता हैl स्मृति शक्ति भी मजबूत होती है lशारीरिक क्षमता तथा मानसिक क्षमता से व्यक्ति विशेष बलिष्ठ होता है, उसका चित शांत होता हैl विद्या अध्ययन संबंधित चीजों में अप्रतिम रूप से लाभ प्राप्त होता हैl उन्हें शिक्षा से विप्रत्व की प्राप्ति होती है, उनके उत्तम चरित्र एवं आचरण के निर्माण में चमत्कारिक रूप से सहायक होता है।

5. दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से भौतिक समृद्धि की प्राप्त होती है, किसी व्यक्ति विशेष के जीवन में सांसारिक सुखों की कमी नहीं रहती है lधन ,ऐश्वर्य ,वैभव से उसका जीवन पड़ीपूर्ण रहता हैl
यह बंद का न केवल भौतिक उन्नति में सहायक होता है, बल्कि अध्यात्मिक प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करता हैl आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति में यह बहुत ही लाभप्रद होता हैl अध्यात्म के अनेक उत्तम पहलुओं का अनुभव प्रदान करता है।

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6. दो मुखी रुद्राक्ष उन लोगों के द्वारा भी धारण किया जा सकता है, जो किसी भी प्रकार के नकारात्मक प्रेत आत्माओं के द्वारा परेशान हैl नाना प्रकार से ऐसी कुकृत्य चीजें परेशान कर रही है, प्रभावित कर रही है, या नकारात्मक लोगों के द्वारा उनके जीवन में अनचाहे अवरोध को बल प्रदान किया जा रहा है lतो ऐसी स्थिति में इन सभी चीजों के निवारण के लिए दो मुखी रुद्राक्ष धारण किया जा सकता है, जिससे रुद्राक्ष के स्पंदन से उनकी सुरक्षा चक्र जागृत होते हैं, एवं कोई भी नकारात्मक चीज उनके मन मस्तिष्क हृदय एवं शरीर को प्रभावित नहीं कर पाती है, या दूषित नहीं कर पाती है।

7. दूषित चंद्र के द्वारा दिए जा रहे किसी भी दुष्प्रभाव को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए भी दो मुखी रुद्राक्ष का प्रयोग किया जा सकता है, इसके साथ ही इसे धारण करने से कई रोगों में यह रामबाण के समान कार्य करता है, जैसे नेत्र से संबंधित विकार हो या हृदय से संबंधित विकार या फेफड़े से संबंधित विभाग मानसिक संताप मानसिक अवसाद अत्यधिक क्रोध नसों से संबंधित कोई बीमारी या मानसिक अवचेतना आदि में यह बहुत ही प्रभावी रूप से जातक को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

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